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CTET Paper II (Social Science) Sep 2014 Solved Paper

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Question Numbers: 121-128
निर्देश : गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प चुनिए
मनुष्य अपने विकास के लिए प्राकृतिक संसाधनों का दोहन करके अपनी विविध आवश्यकताओं की पूर्ति करता है। प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण, संवर्धन एवं मितव्ययितापूर्वक उपयोग मानव की कुशलता, लगन एवं समर्पण पर निर्भर है। प्रकृति के अमूल्य उपहारों, जैसे - वन, जल, खनिज आदि को अपने कल्याण के लिए संपूर्ण प्रयोग करना मानव-मात्र की इच्छा। शक्ति व तर्क शक्ति पर निर्भर है। मानव की प्रगति के लिए सतत विकास का महत्त्व गांधीजी ने बहुत पहले ही पहचान लिया था। इसलिए सतत विकास हेतु मानव की आत्मनिर्भरता को ध्यान में रखकर संसाधनों के संरक्षण पर ज़ोर दिया। विकास का ध्येय जीवन के आर्थिक ही नहीं वरन्‌ सामाजिक, आर्थिक, नैतिक और आध्यात्मिक स्तर को ऊँचा उठाना होना चाहिए। प्रकृति से संस्कृति की ओर बढ़ने की आकांक्षा हमेशा होनी चाहिए | जहाँ इस आकांक्षा की पूर्ति होगी उसे इतिहास में स्वर्ण युग का नाम देना उचित होगा न कि साहित्य और कला की तरक़्क़ी का। इस दृष्टि से अभी तक भारत का स्वर्ण युग दूर-दूर तक दिखाई नहीं देता।
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Question : 122 of 150
Marks: +1, -0
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