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CTET Paper II (Social Science) Sep 2014 Solved Paper

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Question Numbers: 129-135
निर्देश : गद्याश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प चुनिए
हैरानी की बात यह है कि मेरी दलील मित्रों के हलक से नहीं उतरती थी, तब मैं उनसे कहता था - साहित्य की हर विधा को, हर तरह की लेखनी को मैं बतौर चुनौती स्वीकार करता हूँ। आम आदमी से लेकर ख़ास आदमी तक के हृदय को छूना कोई मामूली बात नहीं होती। यह तो आप भी स्वीकार करेंगे, क्योंकि यह काम सिर्फ रामबाण और महाभारत जैसे ग्रंथ ही कर पाते है। मेरी यह दलील रामबाण सिद्ध होती थी, वे सारे मित्र सोच में पड़ जाते थे, क्योंकि वे केवल किसी भी एक वर्ग के लिए लिख पाते थे – ‘मास’ के लिए या ‘क्लास' के लिए। उनके दायरे सीमित थे। लेकिन मैं दायरों के बाहर का शख्स हूँ। शायद इसी कारण मैं आपसे खुलकर अंतरंग बातें भी कर सकता हूँ। बात कहानी की रचना-प्रक्रिया से आरंभ की थी। तब मैं ‘ओ हेनरी' की एक कहानी पढ़ता था और भीतर दो नई कहानियों के बीज अपने आप पड़ जाते थे। न कोई मशक़्क़त, न कोई गहरी सोच। यह प्रोसेस मेरे लिए उतना ही आसान था जितना कि कैरम का खेल। फिर भी ये रचनाएँ। कहानी के शिल्प में कहानी विधा के अंतर्गत लिखी गई पुख्ता क़िस्सागोई हैं। पर यह किस्सागोई ज़िंदगी से अलग नहीं हो सकती।
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Question : 129 of 150
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