Concept:बहुव्रीहि समास में दोनों पद मिलकर किसी अन्य (तीसरे) व्यक्ति या वस्तु का बोध कराते हैं।Explanation:‘मृत्युंजय’ का विग्रह है ‘मृत्यु को जीतने वाला’ अर्थात शिव।यहाँ ‘मृत्यु’ और ‘जय’ शब्द अपने सामान्य अर्थ न देकर किसी दूसरे (शिव) की ओर संकेत करते हैं।अतः यह पद बहुव्रीहि समास का उदाहरण है।अन्य विकल्प – द्विगु (पहला पद संख्यावाचक), कर्मधारय (विशेषण-विशेष्य संबंध), द्वंद्व (दोनों पद प्रधान) – यहाँ उपयुक्त नहीं हैं।Answer:बहुव्रीहि (विकल्प C)विशेष
समास - समास से तात्पर्य 'संक्षिप्तीकरण' से है। जब दो या दो से अधिक शब्दों के योग से जो छोटा शब्द बने उसे समास कहते हैं। समास के माध्यम से कम शब्दों में अधिक अर्थ प्रकट किया जाता है। जैसे – राजा का पुत्र = राजपुत्र।
समास के कुल छः प्रकार हैं
समास का नाम
परिभाषा
उदाहरण
तत्पुरुष समास
जिस समास में उत्तरपद प्रधान हो तथा समास करने के उपरांत विभक्ति (कारक चिन्ह) का लोप हो।
धर्म का ग्रन्थ = धर्मग्रन्थ।तुलसीदास द्वारा कृत = तुलसीदासकृत।
अव्ययीभाव समास
जिस समास में पहला पद (पूर्वपद) अव्यय तथा प्रधान हो।
जन्म से लेकर = आजन्म।मति के अनुसार = यथामति।
कर्मधारय समास
जिस समास के दोनों शब्दों के बीच विशेषण-विशेष्य अथवा उपमान-उपमेय का सम्बन्ध हो।पहचान: विग्रह करने पर दोनों पद के मध्य में 'है जो', 'के समान' आदि आते हैं।
कमल के समान नयन = कमलनयन।महान है जो देव = महादेव।
द्विगु समास
जिस समास में पूर्वपद (पहला पद) संख्यावाचक विशेषण हो।
दो पहरों का समूह = दोपहर।तीनों लोको का समाहार = त्रिलोक।
द्वंद्व समास
जिस समास में दोनों पद प्रधान हो तथा विग्रह करने पर उनके बीच ‘तथा’, ‘या’, ‘अथवा’, ‘एवं’ या ‘और’ का प्रयोग होता हो।
अन्न और जल = अन्नजल।अपना और पराया = अपना-पराया।
बहुव्रीहि समास
जिस समास में दोनों पद प्रधान नहीं होते हैं और दोनों पद मिलकर किसी अन्य विशेष अर्थ की ओर संकेत कर रहे होते हैं।
जो महान वीर है = महावीर अर्थात हनुमान।तीन आँखों वाला = त्रिलोचन अर्थात शिव।
द्विगु तथा बहुव्रीहि समास में अंतर : द्विगु समास का पहला पद संख्यावाचक विशेषण होता है और दूसरा पद विशेष्य होता है जबकि बहुव्रीहि समास में समस्त पद ही विशेषण का कार्य करता है। जैसे – दोपहर- दो पहरों का समूह (द्विगु समास), चतुर्भुज- चार है भुजाएँ जिसकी अर्थात विष्णु (बहुव्रीहि समास)।