Concept:ऊष्म व्यंजन वे होते हैं जिनके उच्चारण में मुख से विशेष प्रकार की गर्म वायु निकलती है। इन्हें महाप्राण व्यंजन भी कहा जाता है।Explanation:ऊष्म व्यंजन तीन होते हैं – श, ष, स।इनके उच्चारण में श्वास की प्रबलता रहती है और मुख के अंदर घर्षण से ऊष्मा उत्पन्न होती है।अन्य विकल्प: अ-ब-स (कुछ स्वर और स्पर्श), च-छ-ज (स्पर्श व्यंजन), य-र-ल (अंतःस्थ व्यंजन) – ये ऊष्म व्यंजन नहीं हैं।व्यंजनों के भेदों की सारणी नीचे दी गई है:
व्यंजन के तीन भेद हैं -
स्पर्श व्यंजन – ‘क’ से ‘म’ तक 25 वर्ण मुख के विभिन्न भागों में जिह्वा के स्पर्श से बोले जाते है । इसलिए इन्हे स्पर्श व्यंजन कहते है ।
अंतःस्थ व्यंजन- ‘य,र,ल,व’- ये चार ऐसे वर्ण हें, जिनके अन्दर स्वर छिपे है, अतः इन्हें अंतःस्थ व्यंजन कहते है ।
ऊष्म व्यंजन – ‘श, ष, स’ – इन चार वर्णों के उच्चारण में मुख से विशेष प्रकार की गर्म (ऊष्म) वायु निकलती है, इसलिए इन्हें ऊष्म व्यंजन कहते है। इनके उच्चारण में श्वास की प्रबलता रहती है ।