Concept:द्विगु समास वह होता है जिसमें पहला पद संख्यावाचक विशेषण हो और समस्त पद किसी समूह या समाहार का बोध कराए।Explanation:‘चौराहा’ शब्द का विग्रह करें – ‘चार राहों का समूह’।यहाँ पहला पद ‘चार’ एक संख्यावाचक विशेषण है और दूसरा पद ‘राहा’ (राहें) है।जब समस्त पद किसी समूह को इंगित करता है और पूर्वपद संख्या हो, तो वह द्विगु समास कहलाता है।अतः ‘चौराहा’ में द्विगु समास है।अन्य समासों की परिभाषाएँ और उदाहरण नीचे दिए गए हैं:
समास - समास से तात्पर्य 'संक्षिप्तीकरण' से है। जब दो या दो से अधिक शब्दों के योग से जो छोटा शब्द बने उसे समास कहते हैं। समास के माध्यम से कम शब्दों में अधिक अर्थ प्रकट किया जाता है। जैसे - राजा का पुत्र – राजपुत्र, समास के छःप्रकार हैं -
समास का नाम
परिभाषा
उदाहरण
तत्पुरुष समास
जिस समास में उत्तरपद प्रधान हो तथा समास करने के उपरांत विभक्ति (कारक चिन्ह) का लोप हो।
धर्म का ग्रन्थ = धर्मग्रन्थतुलसीदास द्वारा कृत = तुलसीदासकृत
अव्ययीभाव समास
जिस समास में पहला पद (पूर्वपद) अव्यय तथा प्रधान हो'।
जन्म से लेकर = आजन्ममति के अनुसार = यथामति।
कर्मधारय समास
जिस समास के दोनों शब्दों के बीच विशेषण-विशेष्य अथवा उपमान-उपमेय का सम्बन्ध हो,पहचान: विग्रह करने पर दोनों पद के मध्य में 'है जो', 'के समान' आदि आते हैं।
कमल के समान नयन = कमलनयनमहान है जो देव = महादेव
द्विगु समास
जिस समास में पूर्वपद (पहला पद) संख्यावाचक विशेषण हो।
दो पहरों का समूह = दोपहरतीनों लोकों का समाहार = त्रिलोक।
द्वंद्व समास
जिस समास में दोनों पद प्रधान हो तथा विग्रह करने पर उनके बीच ‘तथा’, ‘या’, ‘अथवा’, ‘एवं’ या ‘और’ का प्रयोग होता हो ।
अन्न और जल = अन्न-जलअपना और पराया = अपना-पराया।
बहुव्रीहि समास
जिस समास में दोनों पद प्रधान नहीं होते हैं और दोनों पद मिलकर किसी अन्य विशेष अर्थ की ओर संकेत कर रहे होते हैं।
जो महान वीर है = महावीर अर्थात हनुमानतीन आँखों वाला = त्रिलोचन अर्थात शिव
द्विगु समास और बहुव्रीहि समास में अंतर - द्विगु समास का पहला पद संख्यावाचक विशेषण होता है और दूसरा पद विशेष्य होता है जबकि बहुव्रीहि समास में समस्त पद ही विशेषण का कार्य करता है। जैसे – दोपहर- दो पहरों का समूह (द्विगु समास), चतुर्भुज- चार है भुजाएँ जिसकी अर्थात विष्णु (बहुव्रीहि समास)।