Concept:अयोगवाह उन वर्णों को कहते हैं जो न तो स्वर हैं और न ही व्यंजन, बल्कि स्वर के अंत में जुड़ते हैं। ये केवल दो हैं – अनुस्वार (ं) और विसर्ग (ः)।Explanation:हिंदी वर्णमाला में स्वर और व्यंजन के अलावा दो वर्ण होते हैं – अनुस्वार (ं) और विसर्ग (ः)। इन्हें ‘अयोगवाह’ कहा जाता है क्योंकि ये स्वर या व्यंजन के साथ पूरी तरह योग (मिलन) नहीं कर पाते। ये केवल स्वर के बाद आते हैं और उच्चारण में सहायक होते हैं। दिए गए विकल्पों में से केवल विकल्प B ‘अनुस्वार एवं विसर्ग को’ सही है। अन्य विकल्प – महाप्राण, संयुक्त व्यंजन और अल्पप्राण – व्यंजनों की श्रेणी हैं, अयोगवाह नहीं।नीचे तालिकाओं में विस्तार से समझाया गया है:
अयोगवाह — अयोगवाह अनुस्वार (ं) और विसर्ग (ः) को कहते हैं क्योंकि यह ना तो स्वर के अंतर्गत आते हैं और ना ही व्यंजन के अन्तर्गत आते हैं। लेकिन यह स्वर के अंत में अवश्य लगते हैं।‘अं’ और ‘अः’ यह दो अयोगवाह हैं।
अन्य विकल्प
वर्ण
परिभाषा
उदाहरण
महाप्राण
जिन वर्णों के उच्चारण में वायु की पर्याप्त मात्रा होती है, जिसके कारण हकार-जैसी ध्वनि स्पष्ट दिखती है। वे महाप्राण कहलाते हैं। प्रत्येक वर्ग का दूसरा और चौथा वर्ण तथा समस्त ऊष्म वर्ण महाप्राण हैं।
ख, घ; छ, झ; ठ, ढ; थ, ध; फ, भ और श, ष, स, ह।
संयुक्त व्यंजन
जब एक स्वर रहित व्यंजन अन्य स्वर सहित व्यंजन से मिलता है, तब वह संयुक्त व्यंजन या संयुक्ताक्षर कहलाता हैं।
जिन वर्णों के उच्चारण में वायु की सामान्य मात्रा रहती है और हकार जैसी ध्वनि बहुत ही कम होती है। वे अल्पप्राण कहलाते हैं। प्रत्येक वर्ग का पहला, तीसरा और पाँचवाँ वर्ण अल्पप्राण व्यंजन हैं।
क, ग, ङ; ज, ञ; ट, ड, ण; त, द, न; प, ब, म,। अन्तःस्थ (य, र, ल, व ) भी अल्पप्राण ही हैं।
Answer:सही विकल्प B है – अनुस्वार एवं विसर्ग को अयोगवाह कहा जाता है।