ऐसे जनजाति जिन्हें भारतीय संविधान के अनुच्छेद 342 के अंतर्गत सूची बद्ध किया जाता है, अनुसूचित जनजाति कहलाते हैं। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 342 के तहत राष्ट्रपति को अधिकार है, कि वह किसी जनजाति समूह को अनुसूचित घोषित कर सकता है। प्रदेश का 81,861 वर्ग किमी. क्षेत्र अनुसूचित क्षेत्र है, प्रदेश की मुख्य जनजातियाँ बहुत सी उप-जातियों में विभाजित है। - छत्तीसगढ़ के जनजातियों की सामान्य विशेषताएँ:- 1. ये मुख्यत: नीग्रोटो और प्रोटो-ऑस्ट्रेलायड प्रजातियों से सम्बन्धित है। 2. ये विशिष्ट जनजातीय भाषा बोलती है। 3. ये प्राचीन धर्म को मानते हैं, बहुदेववादी होते हैं तथा भूत-प्रेतों की पूजा पर बल देते हैं। 4. ये प्राचीन उद्यमों यथा जंगली फल-फ़ल, कंद-मूल को इकट्ठा करने, शिकार करने अथवा मछली मारने, स्थानांतरित कृषि जैसे कार्य करती है। तथा ये जनजातियाँ प्राय: मांसाहारी है। 5. अधिकाशं जनजातियाँ नग्न या अर्द्धनग्न अवस्था में रहती है। 6. जनजातीय समाज पितृसत्तात्मक है। 7. जनजातियों में गणचिन्ह (Totem) का विशेष महत्त्व है। 8. जनजातीय समाज में स्त्रियाँ गौरवान्वित होती है।