जगन्नाथ प्रसाद भानु- इस युग के प्रतिभावान कवि हुए, उन्होंने छन्द , रामचरित मानस तथा ज्योतिष संबंधी अनेक किताबें लिखी। 'छन्दप्रभाकर', काव्य प्रभाकर', 'काव्यालंकार', 'छन्द 'सारखली' 'रस रत्नाकर', 'तुलसी तत्त्व प्रकाश', 'तुलसी भाव प्रकाश', 'काल विज्ञान', 'काल प्रबोध', 'अंक विलास' आदि उपरोक्त विषयों पर लिखी महत्त्वपूर्ण किताबों के अतिरिक्त उन्होंने ' जयहरी चालीसा' और 'तुम्ही तो हो' नामक भक्ति काव्य लिखे। इसलिए इन्हें छत्तीसगढ़ का ही नहीं भारत का छन्द शास्त्री कहा जाता है। पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी की ख्याति कथाकार, निबंधकार के रूप में थी, उन्होंने कविताएँ भी लिखी। बलदेव प्रसाद मिश्र ने 'छ्त्तीसगढ़ परिचय' नामक कृति लिखी तथा माधव राव सप्रे ने 'रामचरित्र, 'एकनाथ चरित्र' नामक किताबें लिखी' एवं वे मासिक पत्रिका 'छत्तीसगढ़ मित्र' के प्रकाशक भी थे।