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CTET 2 Math and Science 20 Dec 2021 Paper
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Question Numbers: 121-128
निर्देश - नीचे दिए गए गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए:
विद्यालोलुप चीनी संन्यासी नालन्दा की भव्यता और पवित्रता देखकर लट्टू हो गया। ऊँचे-ऊँचे विहार और मठ चारों ओर खड़े थे। बीच-बीच में सभागृह और विद्यालय बने हुए थे। वे सब समाधियों, मंदिरों और स्तूपों से घिरे हुए थे। उनके चारों तरफ बौद्ध शिक्षकों और प्रचारकों के रहने के लिए चौमंजिला इमारतें बनी हुई थीं। उनके सिवा ऊँची-ऊँची मीनारों और विशाल भवनों में नाना प्रकार के बहुमूल्य रत्न जड़े हुए थे। रंग-बिरंगे दरवाजों, कड़ियों, छतों और खम्भों की सजावट को देखकर लोग हतप्रभ रह जाते थे। विद्या मंदिरों के शिखर आकाश से बातें करते थे।
विशालता, नियमबद्धता, और सुप्रबंध के विचार से नालंदा का विश्वविद्यालय वर्तमान काशी की अपेक्षा ऑक्सफोर्ड से अधिक मिलता-जुलता था। विश्वविद्यालय के विहारों में कोई दस हजार भिक्षु विद्यार्थी और डेढ़ हजार अध्यापक रहते थे। केवल दर्शन और धर्मशास्त्र के सौ अध्यापक थे। इससे संबंध रखने वाला पुस्तकालय नौमंजिला था, जिसकी ऊँचाई करीब तीन सौ फीट थी। इसे महाराज बालादित्य ने बनवाया था। इसमें बौद्ध धर्म संबंधी सभी ग्रंथ थे। प्राचीनकाल में इतना बड़ा पुस्तकालय शायद ही कहीं रहा हो।
निर्देश - नीचे दिए गए गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए:
विद्यालोलुप चीनी संन्यासी नालन्दा की भव्यता और पवित्रता देखकर लट्टू हो गया। ऊँचे-ऊँचे विहार और मठ चारों ओर खड़े थे। बीच-बीच में सभागृह और विद्यालय बने हुए थे। वे सब समाधियों, मंदिरों और स्तूपों से घिरे हुए थे। उनके चारों तरफ बौद्ध शिक्षकों और प्रचारकों के रहने के लिए चौमंजिला इमारतें बनी हुई थीं। उनके सिवा ऊँची-ऊँची मीनारों और विशाल भवनों में नाना प्रकार के बहुमूल्य रत्न जड़े हुए थे। रंग-बिरंगे दरवाजों, कड़ियों, छतों और खम्भों की सजावट को देखकर लोग हतप्रभ रह जाते थे। विद्या मंदिरों के शिखर आकाश से बातें करते थे।
विशालता, नियमबद्धता, और सुप्रबंध के विचार से नालंदा का विश्वविद्यालय वर्तमान काशी की अपेक्षा ऑक्सफोर्ड से अधिक मिलता-जुलता था। विश्वविद्यालय के विहारों में कोई दस हजार भिक्षु विद्यार्थी और डेढ़ हजार अध्यापक रहते थे। केवल दर्शन और धर्मशास्त्र के सौ अध्यापक थे। इससे संबंध रखने वाला पुस्तकालय नौमंजिला था, जिसकी ऊँचाई करीब तीन सौ फीट थी। इसे महाराज बालादित्य ने बनवाया था। इसमें बौद्ध धर्म संबंधी सभी ग्रंथ थे। प्राचीनकाल में इतना बड़ा पुस्तकालय शायद ही कहीं रहा हो।
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