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CTET 2 Social and Science 29 Dec 2021 Paper
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Question Numbers: 121-128
नीचे दिए गए गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए तथा पूछे गए प्रश्नों के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए I
जीवन स्वयं एक यात्रा है। जो अपने अंदर यह यात्रा करता है, वह नदी के उस पार पहुँच जाता है और जो बाहर यह यात्रा करता है वह इंतज़ार करता रहता है। आश्चर्य की बात है कि धन संपत्ति बर्बाद होने पर उसका तो हमें दुख होता है परंतु व्यर्थ ही इधर-उधर की बातों में जीवन बर्बाद करने पर लेशमात्र भी अफसोस नहीं होता है। कभी शांत मन से विचार करें कि आखिर हमारे जीवन का असल उद्देश्य क्या है? किसी के लिए यह पैसा, सुविधाएँ, प्रतिष्ठा तो किसी के लिए बच्चे और परिवार हो सकते हैं I यदि यह सब इच्छानुसार मिल जाए तो क्या जीवन में सुख, शांति, सद्भाव, आत्मविश्वास और स्वतंत्रता मिल जाएगी? शायद नहीं क्योंकि वास्तव में यह इंसान का प्राकृतिक स्वभाव है कि यदि उसे एक वस्तु प्राप्त हो जाए तो उसमें दूसरी वस्तु को पाने की लालसा पैदा हो जाती है। पाते रहने की लालसा का यह क्रम अनवरत चलता रहता है। साथ में प्राप्त वस्तुओं के खो जाने के भय की आकुलता भी बनी रहती है। पाने के प्रयास और खोने की सुरक्षा में इंसान अपनी सुख-शांति की बलि देता रहता है।
नीचे दिए गए गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए तथा पूछे गए प्रश्नों के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए I
जीवन स्वयं एक यात्रा है। जो अपने अंदर यह यात्रा करता है, वह नदी के उस पार पहुँच जाता है और जो बाहर यह यात्रा करता है वह इंतज़ार करता रहता है। आश्चर्य की बात है कि धन संपत्ति बर्बाद होने पर उसका तो हमें दुख होता है परंतु व्यर्थ ही इधर-उधर की बातों में जीवन बर्बाद करने पर लेशमात्र भी अफसोस नहीं होता है। कभी शांत मन से विचार करें कि आखिर हमारे जीवन का असल उद्देश्य क्या है? किसी के लिए यह पैसा, सुविधाएँ, प्रतिष्ठा तो किसी के लिए बच्चे और परिवार हो सकते हैं I यदि यह सब इच्छानुसार मिल जाए तो क्या जीवन में सुख, शांति, सद्भाव, आत्मविश्वास और स्वतंत्रता मिल जाएगी? शायद नहीं क्योंकि वास्तव में यह इंसान का प्राकृतिक स्वभाव है कि यदि उसे एक वस्तु प्राप्त हो जाए तो उसमें दूसरी वस्तु को पाने की लालसा पैदा हो जाती है। पाते रहने की लालसा का यह क्रम अनवरत चलता रहता है। साथ में प्राप्त वस्तुओं के खो जाने के भय की आकुलता भी बनी रहती है। पाने के प्रयास और खोने की सुरक्षा में इंसान अपनी सुख-शांति की बलि देता रहता है।
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Question : 124
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