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Question Numbers: 121-128
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सही सर्वाधिक उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए।
हाल ही में मेडिकल इंडस्ट्री के एक जानकार दावा कर रहे थे कि भविष्य में डॉक्टरों सर्जनों की जरूरत भी कम होने वाली है। एआई के जरिए लक्षणों को समझा जाएगा। आपकी केस हिस्ट्री एआई को पता होगी। ताजा हालत पूछ ली जाएगी और प्रिस्क्रिप्शन आपके हाथ में होगा। शारीरिक श्रम से जुड़े कामों पर शायद सबसे कम असर पड़ने वाला है। यह समझने का वक्त है कि एआई से फायदे होंगे या नुकसान। अभी तो इस नकली बुद्धिमता को इंसान ने ही जन्म दिया है। उसका नियंत्रण है, लेकिन एआई वरदान ही रहे और भस्मासुर न बने, उसके लिए यह सोचने की जरूरत भी है कि मानवीय बुद्धिमता के स्तर को इतना ऊँचा कैसे उठाया जाए कि एआई उस पर हावी न हो सके। अब अगर चैट जीपीटी बनाया है तो फिर पढ़ाई-लिखाई और इम्तहानों का वह तरीका कौन सा हो, जो बिना एआई के युवाओं और बच्चों के बौद्धिक स्तर को परख सके।
यह सवाल ऐसे हैं जिनके जवाब दे पाना मुश्किल है, पर नजर जरूर रखनी चाहिए। वैज्ञानिकों को भी तय करना चाहिए कि एआई ऐसी हो जो इंसानियत फैलाने में मददगार हो।
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सही सर्वाधिक उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए।
हाल ही में मेडिकल इंडस्ट्री के एक जानकार दावा कर रहे थे कि भविष्य में डॉक्टरों सर्जनों की जरूरत भी कम होने वाली है। एआई के जरिए लक्षणों को समझा जाएगा। आपकी केस हिस्ट्री एआई को पता होगी। ताजा हालत पूछ ली जाएगी और प्रिस्क्रिप्शन आपके हाथ में होगा। शारीरिक श्रम से जुड़े कामों पर शायद सबसे कम असर पड़ने वाला है। यह समझने का वक्त है कि एआई से फायदे होंगे या नुकसान। अभी तो इस नकली बुद्धिमता को इंसान ने ही जन्म दिया है। उसका नियंत्रण है, लेकिन एआई वरदान ही रहे और भस्मासुर न बने, उसके लिए यह सोचने की जरूरत भी है कि मानवीय बुद्धिमता के स्तर को इतना ऊँचा कैसे उठाया जाए कि एआई उस पर हावी न हो सके। अब अगर चैट जीपीटी बनाया है तो फिर पढ़ाई-लिखाई और इम्तहानों का वह तरीका कौन सा हो, जो बिना एआई के युवाओं और बच्चों के बौद्धिक स्तर को परख सके।
यह सवाल ऐसे हैं जिनके जवाब दे पाना मुश्किल है, पर नजर जरूर रखनी चाहिए। वैज्ञानिकों को भी तय करना चाहिए कि एआई ऐसी हो जो इंसानियत फैलाने में मददगार हो।
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