मीराबाई (1504-1558)- कृष्ण भक्ति शाखा की प्रमुख कवियित्री है। उनकी कविताओं में स्त्री पराधीनता के प्रति एक गहरी टीस है, जो भक्ति के रंग में रंगकर गहरी हो गयी है। मीराबाई ने कृष्ण भक्ति के स्फुट पदों की रचना की है। मीराबाई का जन्म राजस्थान के पाली मे कुरकी नामक गाँव में हुआ। घर वालों के व्यवहार से परेशान होकर वह द्वारका और वृंदावन गई। द्वारका में सवत् 1558 ई. में वो भगवान कृष्ण की मूर्ति में समा गई। मीराबाई ने चार ग्रंथ लिखे- ' नरसी का मायरा' ' गीत गोविंद टीका' 'राम गोविंद' तथा 'राग सोरठ के पद ', तथा 'मीराबाई की पदावली' (गीतों का संकलन ) आदि रचनाएँ लिखी।