घोटुल, मुड़िया जनजाति की महत्त्वपूर्ण सामाजिक-सांस्कृति संस्था ( युवागृह है। यह अविवाहित मुड़िया लड़के-लड़कियों का मिलनघर है, जहाँ उन्हें सामाजिक-सांस्कृतिक प्रशिक्षण दिया जाता है। मुड़िया लोकगीतों में इसे कुंवारों का राज्य कहा जाता है। घोटुल के लड़कों को चेलिक तथा लड़कियों को मोटियारिन कहा जाता है। वहीं लड़कों के मुखिया को सिरदार एवं लड़कियों की मुखिया को बेलोसा कहा जाता है तथा यहाँ का पंसदीदा गीत रेला है।