कृषि एवं औद्योगिक अवशिष्ट पदार्थो जैसे कचरा आदि बायोमास के अंतर्गत आते हैं। दुर्ग, भिलाई, बिलासपुर में कचरे पर आधारित, धमतरी में धान की भूसी पर आधारित, कवर्धा सहकारी शक्कर कारखाने में गन्ने की खोई पर आधारित विद्युत संयंत्र स्थापित किये गए हैं। शासकीय पॉलिटेक्निक दुर्ग, पशु प्रजनन प्रक्षेत्र अंजोरा, वनमण्डल शिकारी टोला में बायोमास गैसीफायर स्थापित किये गए हैं। छत्तीसगढ़ धान की भूसी/छिलकों (बायोमास ) से लगभग 260 मेगावाट स्वच्छ ऊर्जा उत्पादित करता है। छत्तीसगढ़ मार्च 2016 तक बायोमास से लगभग 300MW स्वच्छ ऊर्जा उत्पादित करता है। धान की भूसी से विद्युत उत्पादन के क्षेत्र में कुल 310 मेगावाट क्षमता के उप संयंत्रों के लिए क्रेड़ा ने अनुमति जारी की है, जिसमें से कुल 116.50MW क्षमता के 14 संयंत्र स्थापित हो चुके हैं। नोट- छत्तीसगढ़ राज्य अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण (CREDA)