छत्तीसगढ़ के महाकवि कपिलनाथ कश्यप ने 2 मार्च, 1985 को अपने देहावसान से पूर्व छत्तीसगढ़ी भाषा में तीन महाकाव्यों 'श्रीरामकथा' श्री 'कृष्णकथा' तथा 'महाभारत' या 'श्रीमद- भगवत गीता की रचना की थी। बाद में उन्होंने एक नाटक 'स्वान्त: सुखाय' का भी छत्तीसगढ़ी में अनुवाद किया था।