छत्तीसगढ़ में लोकगायन की अविछिन्न परम्परा विद्यमान है। लोक- गायक परम्परागत गाथाओं, फुटकर गीतों संस्कारिक गीतों, नुत्य गीतों एवं पर्वों से जुड़े गीतों का गायन करते हैं। छत्तीसगढ़ के संस्कार गीतों में भड़ौनी/- भड़ैनी गीत विवाह के अवसर पर बारातियों को भोजन के समय हास- परिहास के लिए गाया जाता है तथा सोंहर गीत का गायन बच्चों के जन्म के साथ या जन्म से पहले गाया जाने वाला जन्म गीत है।