कलार समाज का पौराणिक इतिहास है। समाज के लोग देवाधिदेव भगवान शंकर को अपना ईष्ट देव मानते हैं। इसी वंश/समाज की एक बहादुर महिला कलावती का स्मारक छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिलें में चिरचारी में 'बहादुर कलारिन की माची' नाम से स्थापित है। मध्यकाल में कलावती ने हैहैयवंशी राजा के सामने घुटने नहीं टेके और अपनी अंतिम साँस तक मनचलों और बड़े- बड़े सूबेदारों से अकेली लड़ती रही। लोगों ने उसे चंडी माँ का अवतार माना है।